Author: sanskritdemo
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मेघदूत के आधार पर कालिदास के भौगोलिक ज्ञान की समीक्षा
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मेघदूत में यक्ष-पत्नी की विरहावस्था: एक विस्तृत विवेचन
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मेघदूत का खण्डकाव्यत्व: एक विस्तृत विवेचन
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याज्ञवल्क्य और मैत्रेयी -बृहद आरण्यक उपनिषद
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‘सखि’ (इकारान्त पुँल्लिङ्ग)रूप सिद्धि-sanskrit
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पाणिनीय व्याकरण (लघुसिद्धान्तकौमुदी) के अनुसार ‘हरिः’ रूप की सिद्धि
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सर्व (पुल्लिंग) शब्द की रूपसिद्धि-sanskrit
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“स्यतासी लृलुटोः,सार्वधातुक,आर्धधातुकं शेषः”
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“ससजुषो रुः” “खरवसानयोर्विसर्जनीयः”-अष्टाध्यायी
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अतो दीर्घो यञि -अष्टाध्यायी