रामः (प्रथमा विभक्ति, एकवचन) की सिद्धि
१. प्रातिपदिक संज्ञा (Noun Designation)
सबसे पहले ‘राम’ शब्द को व्याकरण की प्रक्रिया में लाने के लिए उसकी संज्ञा की जाती है।
- सूत्र: अर्थवदधातुरप्रत्ययः प्रातिपदिकम्
- कार्य: ‘राम’ एक अर्थवान शब्द है, जो न धातु है न प्रत्यय, अतः इसकी प्रातिपदिक संज्ञा हुई।
२. प्रत्यय की प्राप्ति (Obtaining the Suffix)
प्रातिपदिक संज्ञा होने के बाद विभक्ति लगाने का अधिकार मिलता है।
- अधिकार सूत्र: ङ्याप्प्रातिपदिकात्, प्रत्ययः, परश्च
- विनायक सूत्र: स्वौजसमौट्छष्टाभ्याम्…सुप् (४.१.२)
- कार्य: इन सूत्रों के सहयोग से २१ प्रत्ययों (सु, औ, जस् आदि) की प्राप्ति हुई।
३. विशिष्ट विभक्ति का चयन (Selecting Number and Case)
हमें ‘एकवचन’ का रूप बनाना है, इसलिए २१ में से केवल एक प्रत्यय चुना जाएगा।
- सूत्र: द्व्येकयोद्विवचनैकवचने (छवि में इसे ‘द्व्येोकयोः’ लिखा गया है)
- कार्य: प्रथमा विभक्ति एकवचन की विवक्षा (इच्छा) में ‘सुँ’ प्रत्यय आया।
- स्थिति: राम + सुँ
४. इत् संज्ञा और लोप (Anubandha Lopa)
प्रत्यय के उस भाग को हटाना जो केवल उच्चारण या संकेत के लिए है।
- सूत्र: उपदेशेऽजनुनासिक इत् और तस्य लोपः
- कार्य: ‘सुँ’ में स्थित अनुनासिक ‘उ’ की इत् संज्ञा हुई और उसका लोप हो गया। अब केवल ‘स्’ बचा।
- स्थिति: राम + स्
५. ‘रु’ आदेश (Substitution of Ru)
पद के अंत में स्थित ‘स’ को ‘रु’ में बदला जाता है।
- सूत्र: ससजुषो रुः
- कार्य: पदान्त ‘स्’ के स्थान पर ‘रु’ आदेश हुआ।
- स्थिति: राम + रु
६. पुनः इत् संज्ञा और लोप
- कार्य: ‘रु’ के ‘उ’ की भी पूर्ववत् (उपदेशेऽजनुनासिक इत्) इत् संज्ञा और लोप हुआ। अब केवल ‘र्’ बचा।
- स्थिति: राम + र्
७. अवसान संज्ञा और विसर्ग (Final Transformation)
जब वर्णों का उच्चारण समाप्त हो जाता है, तो उसे ‘अवसान’ कहते हैं।
- सूत्र: विरामोऽवसानम् और खरवसानयोर्विसर्जनीयः
- कार्य: वर्णों के अभाव (विराम) के कारण ‘र्’ की अवसान संज्ञा हुई और फिर उस ‘र्’ को विसर्ग (ः) में बदल दिया गया।
- स्थिति: राम + ः = रामः
निष्कर्ष
इस प्रकार व्याकरण के इन ७ चरणों और संबंधित सूत्रों के माध्यम से ‘रामः’ रूप सिद्ध होता है।

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