ऋग्वेदः 1.25 — वरुण सूक्त

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1. मूल परिचय

तथ्यउत्तर
वेदऋग्वेद
मण्डलप्रथम
सूक्त25
देवतावरुण
ऋषिशुनःशेप आजीगर्त
मन्त्र21
प्रमुख विषयवरुण की स्तुति, ऋत, पाप से मुक्ति, क्षमा-प्रार्थना
प्रमुख प्रतीकवरुण-पाश


1. प्रथम मन्त्र

यच्चिद्धि ते विशो यथा प्र देव वरुण व्रतम्।
मिनीमसि द्यवि-द्यवि॥

सरल अर्थ

हे देव वरुण! तुम्हारे जो व्रत/नियम हैं, हम प्रतिदिन उनका उल्लंघन कर बैठते हैं।

NET Point

वरुण → व्रत/नियम के रक्षक

यहाँ वरुण की नैतिक एवं ऋत-आधारित सत्ता दिखाई देती है।


2. वरुण का स्वरूप

ऋग्वेद 1.25 में वरुण को एक ऐसे देवता के रूप में प्रस्तुत किया गया है जो:

  • ऋत की रक्षा करते हैं
  • देवताओं और मनुष्यों के कर्मों पर दृष्टि रखते हैं
  • पाप करने वाले को दण्ड दे सकते हैं
  • अपने पाश से पापी को बाँधते हैं
  • अपराधी को क्षमा भी कर सकते हैं
  • भक्त से पाप-मुक्ति की प्रार्थना स्वीकार करते हैं।

इसलिए वरुण की उपासना में भय + श्रद्धा + क्षमा-याचना तीनों भाव मिलते हैं।


3. वरुण और पाश

वरुण का एक बहुत महत्वपूर्ण प्रतीक है:

पाश (बंधन)

वरुण को पाशधारी देवता माना जाता है। उनके पाश का सम्बन्ध पाप और अपराध के दण्ड से है।

NET Trick:
👉 वरुण — पाश
👉 वरुण — ऋत
👉 वरुण — नैतिक व्यवस्था
👉 वरुण — पाप-मुक्ति की प्रार्थना

इन चारों को एक साथ याद करो।


4. प्रसिद्ध मन्त्र — 1.25.18

मा नो वधाय हतवे जिहीळानस्य रीरधः।
मा हृणानस्य मन्यवे॥

सरल अर्थ

हे वरुण! हमारे अपराध के कारण हमें अपने वध या क्रोध का पात्र मत बनाओ। हमारे प्रति क्रोधित मत हो।

यह मन्त्र वरुण के दण्डकारी और क्षमाशील दोनों रूपों को समझने में महत्वपूर्ण है।


5. अत्यन्त महत्वपूर्ण — 1.25.19

कितवासो यद् रिरिपुर्न दीविजं
जिहीळानस्य रीरधः।

यहाँ जुआरी/अपराध आदि के प्रसंग से मनुष्य के दोष और उसके परिणामों की ओर संकेत मिलता है।

NET Perspective

वरुण सूक्त में मानवीय अपराध-बोध और पाप से मुक्ति की इच्छा विशेष रूप से दिखाई देती है।


6. अन्तिम प्रार्थना

सूक्त के अन्त में वरुण से प्रार्थना का भाव अत्यन्त महत्वपूर्ण है—

मनुष्य चाहता है कि वरुण उसके अपराधों को क्षमा करें और उसे अपने बन्धन से मुक्त करें।

इसलिए ऋग्वेद 1.25 = वरुण + ऋत + पाश + पाप + क्षमा का सम्बन्ध याद रखना बहुत उपयोगी है।


⭐ UGC NET Master Notes

वरुण के साथ ये शब्द जोड़कर याद करो:

वरुण

⬇️

ऋत

⬇️

व्रत

⬇️

पाश

⬇️

पाप/अपराध

⬇️

दण्ड

⬇️

क्षमा

यह पूरा conceptual chain NET में बहुत काम आएगा।


🔥 संभावित MCQs

Q1. ऋग्वेद 1.25 के देवता कौन हैं?
A. अग्नि
B. इन्द्र
C. वरुण
D. सोम

उत्तर: C. वरुण


Q2. ऋग्वेद 1.25 के ऋषि कौन हैं?
A. मधुच्छन्दा
B. शुनःशेप आजीगर्त
C. विश्वामित्र
D. वसिष्ठ

उत्तर: B. शुनःशेप आजीगर्त


Q3. वरुण का प्रमुख सम्बन्ध किससे है?

A. ऋत
B. पाश
C. नैतिक व्यवस्था
D. उपर्युक्त सभी

उत्तर: D. उपर्युक्त सभी


Q4. ऋग्वैदिक वरुण को किस रूप में समझना सबसे उचित है?

A. केवल जल के देवता
B. केवल युद्ध के देवता
C. ऋत एवं नैतिक व्यवस्था के रक्षक
D. केवल अग्नि के रूप में

उत्तर: C. ऋत एवं नैतिक व्यवस्था के रक्षक


Q5. वरुण का प्रमुख प्रतीक क्या है?

A. वज्र
B. चक्र
C. पाश
D. त्रिशूल

उत्तर: C. पाश


📌 एक लाइन में याद करो

ऋग्वेद 1.25 — शुनःशेप आजीगर्त — वरुण — ऋत — व्रत — पाश — पाप — क्षमा।

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