विषय: संज्ञाप्रकरणम् – मुखनासिकावचनोऽनुनासिकः (अनुनासिक संज्ञा और वर्णों के भेद)
यह सूत्र वर्णों की ‘अनुनासिक’ संज्ञा (नाम) निर्धारित करता है और इसके आधार पर स्वरों के कुल कितने भेद होते हैं, इसका गणित समझाता है।
१. सूत्र और उसका अर्थ
सूत्र: मुखनासिकावचनोऽनुनासिकः (१।१।८) अर्थ: मुख सहित नासिका (नाक) से उच्चारित होने वाला वर्ण ‘अनुनासिक’ संज्ञक होता है।
- सरल व्याख्या: जब किसी वर्ण को बोलते समय वायु मुख (मुँह) के साथ-साथ नासिका (नाक) से भी बाहर निकलती है, तो उस वर्ण को अनुनासिक कहते हैं।
- उदाहरण:
- स्वर: अँ, इँ, उँ आदि।
- व्यंजन: ञ्, म्, ङ, ण, न (प्रत्येक वर्ग का पंचम वर्ण)।
२. स्वरों के कुल भेदों की गणना (अठारह और बारह भेद)
इस सूत्र के बाद व्याकरण में मुख्य स्वरों के भेदों की संख्या स्पष्ट होती है। भेद तीन आधारों पर तय होते हैं:
- काल के आधार पर: ह्रस्व, दीर्घ, प्लुत (३)
- स्थान के आधार पर: उदात्त, अनुदात्त, स्वरित (३) →3×3=9 भेद
- नासिका के आधार पर: अनुनासिक, अननुनासिक (निरनुनासिक) (२) →9×2=18 भेद
इसी गणित के आधार पर वर्णों के निम्नलिखित भेद होते हैं:
- अ, इ, उ, ऋ = १८ भेद (अष्टादश): इनके ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत तीनों रूप होते हैं, इसलिए इनके कुल १८ भेद बनते हैं।
- लृ = १२ भेद (द्वादश): लृ वर्ण का ‘दीर्घ’ रूप नहीं होता (लृ कभी बड़ा नहीं होता)। इसलिए इसके ६ दीर्घ भेद घट जाते हैं (18−6=12)।
- एच् (ए, ओ, ऐ, औ) = १२ भेद (द्वादश): इन चारों संयुक्त स्वरों का ‘ह्रस्व’ रूप नहीं होता (ये हमेशा बड़े या प्लुत ही होते हैं)। इसलिए इनके ६ ह्रस्व भेद घट जाते हैं (18−6=12)।
३. ‘अ’ कार के १८ भेदों की स्पष्ट तालिका
आपकी पाठ्यसामग्री के अनुसार अकार के १८ भेदों को सरल रूप में नीचे समझा जा रहा है:
क) ह्रस्व अकार के ६ भेद (एकमात्रिक):
- सानुनासिक उदात्त: अँ
- सानुनासिक अनुदात्त: अँ॒
- सानुनासिक स्वरित: अँ॑
- निरनुनासिक उदात्त: अ
- निरनुनासिक अनुदात्त: अ॒
- निरनुनासिक स्वरित: अ॑
ख) दीर्घ आकार के ६ भेद (द्विमात्रिक):
- सानुनासिक उदात्त: आँ
- सानुनासिक अनुदात्त: आँ॒
- सानुनासिक स्वरित: आँ॑
- निरनुनासिक उदात्त: आ
- निरनुनासिक अनुदात्त: आ॒
- निरनुनासिक स्वरित: आ॑
ग) प्लुत अकार के ६ भेद (त्रिमात्रिक):
- सानुनासिक उदात्त: आँ३
- सानुनासिक अनुदात्त: आँ३॒
- सानुनासिक स्वरित: आँ३॑
- निरनुनासिक उदात्त: आ३
- निरनुनासिक अनुदात्त: आ३॒
- निरनुनासिक स्वरित: आ३॑
महत्वपूर्ण बिंदु (परीक्षा उपयोगी तथ्य)
- अनुनासिक संज्ञा का सूत्र: मुखनासिकावचनोऽनुनासिकः।
- १८ भेद वाले वर्ण: अ, इ, उ, ऋ।
- १२ भेद वाले वर्ण: लृ (दीर्घ के अभाव में) और ए, ओ, ऐ, औ (ह्रस्व के अभाव में)।

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