भू धातु के लट् लकार के प्रथम पुरुष को समझने के बाद, अब मध्यम पुरुष (भवसि, भवथः, भवथ) की सिद्धि को समझते हैं।
7 चरण बिल्कुल वही हैं जो हमने ‘भवति’ में सीखे थे (जैसे: भूवादयो धातवः, वर्तमाने लट्, कर्तरि शप् आदि)। बदलाव केवल अंतिम चरणों में प्रत्यय के अनुसार आता है।
1. भवसि (मध्यम पुरुष, एकवचन)
स्थिति: भू धातु से वर्तमान काल, मध्यम पुरुष, एकवचन विवक्षा में।
| क्रम | सूत्र | कार्य / सरल अर्थ | स्थिति |
| 1. | भूवादयो धातवः | ‘भू’ की धातु संज्ञा होती है। | भू |
| 2. | वर्तमाने लट् | लट् लकार का आगमन। | भू + लट् |
| 3. | तिप्तस्झिसिप्थस्थ… | मध्यम पुरुष एकवचन की विवक्षा में लट् के स्थान पर ‘सिप्‘ प्रत्यय आता है। | भू + सिप् |
| 4. | हलन्त्यम् व तस्य लोपः | ‘सिप्’ के अंतिम ‘प्’ की इत्-संज्ञा होकर लोप हो जाता है। केवल ‘सि‘ बचता है। | भू + सि |
| 5. | कर्तरि शप् व अनुबन्ध लोप | धातु और प्रत्यय के बीच ‘शप्’ विकरण आता है, जिसमें से केवल ‘अ‘ शेष रहता है। | भू + अ + सि |
| 6. | सार्वधातुकार्धधातुकयोः | ‘भू’ के ‘ऊ’ को गुण ‘ओ‘ आदेश होता है। | भो + अ + सि |
| 7. | एचोऽयवायावः | ‘ओ’ को अयादि संधि से ‘अव्‘ आदेश होता है (भ् + अव् + अ = भव)। | भव + सि |
| 8. | वर्ण सम्मेलन | सभी वर्णों को आपस में मिला दिया जाता है। | भवसि |
इति सिद्धम्।
2. भवथः (मध्यम पुरुष, द्विवचन)
स्थिति: भू धातु से वर्तमान काल, मध्यम पुरुष, द्विवचन विवक्षा में।
| क्रम | सूत्र | कार्य / सरल अर्थ | स्थिति |
| 1. | भूवादयो धातवः से एचोऽयवायावः | (क्रम 1 से 7 तक ‘भवसि’ की तरह समान प्रक्रिया से ‘भव’ अंग तैयार होता है और प्रत्यय ‘थस्‘ आता है)। | भव + थस् |
| 2. | ससजुषो रुः | पद के अंत में स्थित सकार (‘स्’) को ‘रु‘ आदेश होता है। | भव + थरु |
| 3. | उपदेशेऽजनुनासिक इत् व तस्य लोपः | ‘रु’ के ‘उ’ का लोप होकर केवल ‘र्‘ शेष रहता है। | भव + थर् |
| 4. | खरवसानयोर्विसर्जनीयः | पद के अंत में रकार (‘र्’) को विसर्ग (ः) आदेश होता है। | भवथः |
इति सिद्धम्।
3. भवथ (मध्यम पुरुष, बहुवचन)
स्थिति: भू धातु से वर्तमान काल, मध्यम पुरुष, बहुवचन विवक्षा में।
| क्रम | सूत्र | कार्य / सरल अर्थ | स्थिति |
| 1. | भूवादयो धातवः से एचोऽयवायावः | (समान प्रक्रिया से ‘भव’ अंग तैयार होता है और बहुवचन का प्रत्यय ‘थ‘ आता है)। | भव + थ |
| 2. | वर्ण सम्मेलन | वर्णों को आपस में जोड़ दिया जाता है। (यहाँ अंत में ‘स्’ नहीं है, इसलिए विसर्ग नहीं आएगा)। | भवथ |
इति सिद्धम्।
ध्यान देने योग्य स्मार्ट पॉइंट:
- भवथः और भवथ में अंतर: द्विवचन में प्रत्यय ‘थस्‘ होता है, इसलिए सकार को विसर्ग होकर भवथः बनता है। बहुवचन में प्रत्यय केवल ‘थ‘ होता है, इसलिए इसमें कोई विसर्ग नहीं आता और यह भवथ बनता है। परीक्षा में यह बारीक अंतर बहुत मायने रखता है।
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