📝 कुण्डली विज्ञान– मूलभूत अवधारणाएं set-A

समय: 1 घण्टा | पूर्णांक (Max Marks): 30

भाग ‘क’ (Long Answer Question) — कुल अंक: 12

नोट: निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न का विस्तृत उत्तर दीजिए (शब्द सीमा: 250-300 शब्द):

प्रश्न 1: पंचस्कंधात्मक ज्योतिष शास्त्र से आप क्या समझते हैं? इसके अंतर्गत आने वाले प्रमुख अंगों (सिद्धांत, संहिता, होरा, प्रश्न एवं शकुन) का सविस्तार वर्णन कीजिए।

अथवा (OR)

प्रश्न 2: ‘काल-पुरुष’ की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए उसके विभिन्न अंग-विचारों पर प्रकाश डालिए तथा द्वादश (12) भावों से विचारणीय मुख्य विषयों को समझाइए।


भाग ‘ख’ (Medium Answer Question) — कुल अंक: 8

नोट: किसी एक प्रश्न का सटीक उत्तर दीजिए (शब्द सीमा: 150-200 शब्द):

प्रश्न 3: जातक की कुण्डली में बनने वाले ‘गजकेसरी योग’ और ‘राजयोग’ के निर्माण की स्थिति तथा उनके फलित (प्रभाव) की विवेचना कीजिए।

अथवा (OR)

प्रश्न 4: शनि की ‘साढ़े साती’ और ‘ढैया’ विचार से क्या अभिप्राय है? जातक की आयु विचार में इसका क्या महत्व है?

परीक्षक की टिप: साढ़े साती (7.5 वर्ष) और ढैया (2.5 वर्ष) की समय अवधि को स्पष्ट रूप से अंडरलाइन करें।


भाग ‘ग’ (Short Notes) — कुल अंक: 10 ($3.5 + 3.5 + 3$ अंक)

नोट: निम्नलिखित में से किन्हीं तीन पर संक्षिप्त टिप्पणी (Short Notes) लिखिए (शब्द सीमा: 50-80 शब्द प्रति टॉपिक):

प्रश्न 5:

  1. लग्न कुण्डली और चन्द्र कुण्डली में अंतर (या सामान्य परिचय)
  2. गोचर कुण्डली का महत्व
  3. विंशोत्तरी दशा साधन
  4. शकुन विचार

📝 कुण्डली विज्ञान– मूलभूत अवधारणाएं (Set-B)

प्रश्न 1: फलादेश (Predictions) में विभिन्न प्रकार की कुण्डलियों की क्या उपयोगिता है? लग्न कुण्डली, चन्द्र कुण्डली और नवमांश कुण्डली का सामान्य परिचय देते हुए इनके महत्व को स्पष्ट कीजिए।

अथवा (OR)

प्रश्न 2: कुण्डली निर्माण की प्रयोगात्मक विधि का सामान्य परिचय दीजिए। एक सामान्य कुण्डली चक्र (Chart) का निर्माण करते हुए उसमें द्वादश भावों की विशिष्ट संज्ञाएँ (जैसे- तनु, धन, सहज आदि) दर्शाइए।


भाग ‘ख’ (Medium Answer Question) — कुल अंक: 8

नोट: किसी एक प्रश्न का सटीक उत्तर दीजिए (शब्द सीमा: 150-200 शब्द):

प्रश्न 3: ज्योतिष शास्त्र में ‘पंचमहापुरुष योग’ से क्या तात्पर्य है? यह किन ग्रहों के द्वारा बनता है और जातक पर इसका क्या प्रभाव होता है? संक्षिप्त में समझाइए।

अथवा (OR)

प्रश्न 4: जातक के जीवन में ‘शुभ और अशुभ योगों’ का विचार किस प्रकार किया जाता है? द्वादश भावों के संदर्भ में शुभाशुभ योगों की महत्ता स्पष्ट कीजिए।


भाग ‘ग’ (Short Notes) — कुल अंक: 10 ($3.5 + 3.5 + 3$ अंक)

नोट: निम्नलिखित में से किन्हीं तीन पर संक्षिप्त टिप्पणी (Short Notes) लिखिए (शब्द सीमा: 50-80 शब्द प्रति टॉपिक):

प्रश्न 5:

  1. होरा कुण्डली (Significance of Hora)
  2. संहिता और प्रश्न ज्योतिष में अंतर
  3. दशा साधन परिचय (Dasha System)
  4. आयु विचार के मुख्य नियम

चूंकि आपका पूरा सिलेबस पिछले दो सेट्स में कवर हो चुका है, इसलिए एक परीक्षक (Examiner) के तौर पर इस तीसरे सेट (Set-C) में मैंने प्रश्नों को थोड़ा ट्विस्ट (घुमाकर) किया है। परीक्षा में कई बार सीधे प्रश्न न पूछकर उन्हें थोड़ा घुमा दिया जाता है।

इस अंतिम सेट को देख लीजिए ताकि आप हर स्थिति के लिए तैयार रहें:


📝 कुण्डली विज्ञान– मूलभूत अवधारणाएं (Set-C)

समय: 1 घण्टा | पूर्णांक (Max Marks): 30

भाग ‘क’ (Long Answer Question) — कुल अंक: 12

नोट: निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न का विस्तृत उत्तर दीजिए (शब्द सीमा: 250-300 शब्द):

प्रश्न 1: “ज्योतिष शास्त्र केवल भविष्यकथन नहीं, बल्कि एक संपूर्ण विज्ञान है।” इस कथन के आलोक में पंचस्कंधात्मक ज्योतिष के व्यावहारिक महत्व और शकुन एवं प्रश्न ज्योतिष की प्रासंगिकता को स्पष्ट कीजिए।

अथवा (OR)

प्रश्न 2: कुण्डली के द्वादश (12) भावों को मानव शरीर (काल-पुरुष) के अंगों के साथ वर्गीकृत कीजिए। प्रथम, चतुर्थ, सप्तम और दशम भाव (केन्द्र स्थानों) से विचारणीय मुख्य विषयों का विशेष उल्लेख कीजिए।


भाग ‘ख’ (Medium Answer Question) — कुल अंक: 8

नोट: किसी एक प्रश्न का सटीक उत्तर दीजिए (शब्द सीमा: 150-200 शब्द):

प्रश्न 3: यदि किसी जातक की कुण्डली में ‘शनि की ढैया’ चल रही हो, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार उसकी आयु और स्वास्थ्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है? इसके आकलन के नियम बताइए।

अथवा (OR)

प्रश्न 4: पंचमहापुरुष योग और गजकेसरी योग में क्या अंतर है? कुण्डली में इन दोनों योगों की उपस्थिति जातक को किस प्रकार ‘राजयोग’ के समान फल देती है?


भाग ‘ग’ (Short Notes) — कुल अंक: 10 ($3.5 + 3.5 + 3$ अंक)

नोट: निम्नलिखित में से किन्हीं तीन पर संक्षिप्त टिप्पणी (Short Notes) लिखिए (शब्द सीमा: 50-80 शब्द प्रति टॉपिक):

प्रश्न 5:

  1. नवमांश कुण्डली का फलित में उपयोग
  2. सिद्धांत और संहिता ज्योतिष में मुख्य अंतर
  3. विंशोत्तरी दशा का महत्व
  4. गोचर विचार (Transit of Planets)

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