भू धातु (लट् लकार, मध्यम पुरुष) के तीनों वचनों की सिद्धि-प्रक्रिया सूत्रोल्लेख सहित दी गई है।
1. भवसि (मध्यम पुरुष, एकवचन)
धातु: भू (सत्तायाम्)
- भू + लट्: ‘वर्तमाने लट्’ सूत्र से वर्तमान काल में ‘लट्’ प्रत्यय।
- भू + सिप्: ‘तिप्तस्झिसिप्…’ सूत्र से मध्यम पुरुष एकवचन में ‘सिप्‘ प्रत्यय हुआ। (‘प्’ की इत्संज्ञा होकर ‘सि’ शेष रहा)।
- भू + शप् + सि: ‘कर्तरि शप्’ सूत्र से धातु और प्रत्यय के बीच ‘शप्‘ (अ) विकरण हुआ।
- भो + अ + सि: ‘सार्वधातुकार्धधातुकयोः‘ सूत्र से ‘भू’ के ‘ऊ’ को गुण ‘ओ‘ हुआ।
- भव् + अ + सि: ‘एचोऽयवायावः’ सूत्र से ‘ओ’ के स्थान पर ‘अव्‘ आदेश हुआ।
- भवसि: वर्ण-सम्मेलन करने पर ‘भवसि‘ रूप सिद्ध हुआ।
2. भवथः (मध्यम पुरुष, द्विवचन)
धातु: भू (सत्तायाम्)
- भू + लट्: ‘वर्तमाने लट्’ सूत्र से ‘लट्’ प्रत्यय।
- भू + थस्: ‘तिप्तस्झि…’ सूत्र से मध्यम पुरुष द्विवचन में ‘थस्‘ प्रत्यय हुआ।
- भू + शप् + थस्: ‘कर्तरि शप्’ सूत्र से ‘शप्‘ (अ) विकरण हुआ।
- भो + अ + थस्: ‘सार्वधातुकार्धधातुकयोः‘ सूत्र से ‘भू’ को गुण ‘ओ‘ हुआ।
- भव् + अ + थस्: ‘एचोऽयवायावः’ सूत्र से ‘ओ’ को ‘अव्‘ आदेश हुआ। (रूप बना: भवथस्)
- भवथः: ‘ससजुषो रुः‘ से ‘स्’ को ‘रु’ (र्) तथा ‘खरवसानयोर्विसर्जनीयः‘ सूत्र से ‘र्’ को विसर्ग होकर ‘भवथः‘ रूप सिद्ध हुआ।
3. भवथ (मध्यम पुरुष, बहुवचन)
धातु: भू (सत्तायाम्)
- भू + लट्: ‘वर्तमाने लट्’ सूत्र से ‘लट्’ प्रत्यय।
- भू + थ: ‘तिप्तस्झि…’ सूत्र से मध्यम पुरुष बहुवचन में ‘थ‘ प्रत्यय हुआ। (मूल प्रत्यय ‘थ’ ही है, इसमें विसर्ग नहीं होता)।
- भू + शप् + थ: ‘कर्तरि शप्’ सूत्र से ‘शप्‘ (अ) विकरण हुआ।
- भो + अ + थ: ‘सार्वधातुकार्धधातुकयोः‘ सूत्र से ‘भू’ को गुण ‘ओ‘ हुआ।
- भव् + अ + थ: ‘एचोऽयवायावः’ सूत्र से ‘ओ’ को ‘अव्‘ आदेश हुआ।
- भवथ: वर्ण-सम्मेलन करने पर ‘भवथ‘ रूप सिद्ध हुआ।
मुख्य अंतर:
- भवसि: इसमें ‘सिप्’ का ‘सि’ जुड़ता है।
- भवथः: इसमें ‘थस्’ का ‘स्’ विसर्ग में बदल जाता है।
- भवथ: इसमें ‘थ’ प्रत्यय होता है, इसलिए अन्त में विसर्ग नहीं आता है।

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