पञ्चदशोऽध्यायः

📜 श्लोक (वमनोपग औषध):

मदनमधुकलम्बानिम्बबिम्बीविशाला
त्रपुसकुटजमूर्वा देवदालीकृमिघ्नम्।
विदुलदहनचित्राः कोशवत्यौ करञ्जः
कणलवणवचैलासर्षपाश्छर्दनानि ॥१॥


🔹 सरल अर्थ:

यह सभी औषधियाँ वमन (उल्टी कराने) के लिए उपयोग होती हैं, जिससे शरीर से विशेषकर कफ दोष बाहर निकाला जाता है।

🔹 सरल अर्थ:

इस श्लोक में वे औषधियाँ बताई गई हैं जो वमन (emesis therapy) के लिए उपयोग होती हैं — यानी शरीर से दोष (खासतौर पर कफ) बाहर निकालने के लिए उल्टी कराई जाती है।

🔹 श्लोक में दी गई औषधियाँ:

  • मदन (मदनफल)
  • मधुक
  • लम्बा
  • निम्ब (नीम)
  • बिम्बी
  • विशाला
  • त्रपुस
  • कुटज
  • मूर्वा
  • देवदाली
  • कृमिघ्न
  • विदुल
  • दहन
  • चित्रा
  • कोशवती
  • करञ्ज
  • कण
  • लवण
  • वचा
  • इलायची
  • सर्षप (सरसों)

👉 ये सभी औषधियाँ मिलकर वमन क्रिया (Vamana therapy) में प्रयोग होती हैं।

🔹 याद करने का आसान तरीका (trick):

मदन मधुक लम्ब निम्ब बिम्बी विशाला…”
👉 शुरुआत के 4–5 शब्दों को बार-बार बोलो, फिर बाकी अपने आप flow में याद हो जाते हैं।

🔹 Exam point:

  • यह श्लोक = वमनोपग औषध (Vamana drugs list)
  • उपयोग = कफ दोष को बाहर निकालना

📜 श्लोक (विरेचनोपग औषध):

निकुम्भकुम्भत्रिफलागवाक्षी
स्नुक्शङ्खिनीनीलिनितिल्वकानि।
शम्याककम्पिल्लकहेमदुग्धा
दुग्धं च मूत्रं च विरेचनानि ॥२॥


🔹 सरल अर्थ:

इस श्लोक में वे औषधियाँ बताई गई हैं जो विरेचन (purgation therapy) के लिए उपयोग होती हैं — यानी पित्त दोष को शरीर से नीचे के मार्ग से बाहर निकालना।


🔹 मुख्य औषधियाँ:

  • निकुम्भ
  • कुम्भ
  • त्रिफला
  • गवाक्षी
  • स्नुक
  • शङ्खिनी
  • नीलिनी
  • तिल्वक
  • शम्याक
  • कम्पिल्लक
  • हेमदुग्धा
  • दुग्ध (दूध)
  • मूत्र

👉 ये सभी विरेचन द्रव्य (purgatives) हैं।


🔹 याद करने का आसान trick:

👉निकुम्भ–कुम्भ–त्रिफला–गवाक्षी…”
(
पहली लाइन याद बाकी अपने आप जुड़ जाएगा)

या छोटा flow:
👉निकुम्भ कुम्भ त्रिफला, स्नुक शंखिनी तिल्वक…”


🔹 Exam point:

  • यह श्लोक = विरेचनोपग औषध
  • उपयोग = पित्त दोष निकालना (downward cleansing)

अगर तुम compare करना चाहो तो:

  • वमन = ऊपर से (उल्टी) कफ
  • विरेचन = नीचे से (पर्गेशन) पित्त

📜 श्लोक (निरूहण औषध):

मदनकुटजकुष्ठदेवदाली
मधुकवचादशमूलदारुरास्नाः।
यवमिशिकृतवेधनं कुलत्था
मधु लवणं त्रिवृता निरूहणानि ॥३॥


🔹 सरल अर्थ:

इस श्लोक में वे औषधियाँ बताई गई हैं जो निरूह बस्ती (Decoction enema) में उपयोग होती हैं।
👉 इसका काम होता है वात दोष को संतुलित करना और शरीर की शुद्धि करना।


🔹 मुख्य औषधियाँ:

  • मदन
  • कुटज
  • कुष्ठ
  • देवदाली
  • मधुक
  • वचा
  • दशमूल
  • दारु
  • रास्ना
  • यव
  • मिशी (सौंफ आदि)
  • कृतवेधन
  • कुलत्थ
  • मधु (शहद)
  • लवण
  • त्रिवृत

🔹 याद करने का आसान trick:

👉मदन–कुटज–कुष्ठ–देवदाली…”
(
पहली लाइन पकड़ो बाकी flow में आ जाएगा)

या छोटा:
👉मदन कुटज कुष्ठ + दशमूल दारु रास्ना”


🔹 Exam point:

  • यह श्लोक = निरूहण औषध (Niruha Basti drugs)
  • उपयोग = वात दोष को शांत करना

🔥 Quick comparison (बहुत important):

  • वमनऊपर से (उल्टी) कफ
  • विरेचननीचे से पित्त
  • निरूह बस्तीएनीमा वात

📜 श्लोक (शिरोविरेचनोपग औषध):

वेल्लापामार्गव्योषदार्वीसुराला
बीजं शैरीषं बार्हतं शैग्रवं च।
सारो माधूकः सैन्धवं तार्थ्यशैलं
त्रुट्यौ पृथ्वीका शोधयन्त्युत्तमाङ्गम् ॥४॥


🔹 सरल अर्थ:

इस श्लोक में वे औषधियाँ दी गई हैं जो शिरोविरेचन (नस्य कर्म) में काम आती हैं।
👉 यानी ये औषधियाँ सिर (उत्तमाङ्ग) को शुद्ध करती हैं — जैसे नाक, मस्तिष्क, साइनस आदि।


🔹 मुख्य औषधियाँ:

  • वेला
  • अपामार्ग
  • व्योष (सोंठ, मरीच, पिप्पली)
  • दार्वी
  • सुराला
  • शिरीष बीज
  • बार्हत
  • शैग्रव
  • माधूक
  • सैन्धव लवण
  • तार्थ्य शैल
  • त्रुटि
  • पृथ्वीका

🔹 याद करने का आसान trick:

👉वेल्ला–अपामार्ग–व्योष–दार्वी…”
(
पहली लाइन strong कर लो बाकी flow में याद)

या ultra-short:
👉वेल्ला अपामार्ग व्योष + शिरीष सैन्धव”


🔹 Exam point:

  • यह श्लोक = शिरोविरेचनोपग औषध (Nasya drugs)
  • उपयोग = सिर की शुद्धि (Head cleansing)

🔥 Final Quick Revision (चारों एक साथ):

  • वमनकफ उल्टी
  • विरेचनपित्त नीचे से शुद्धि
  • निरूह बस्तीवात एनीमा
  • शिरोविरेचन (नस्य)सिर नाक से शुद्धि

अगर तुम अभी revise कर रही हो, तो एक smart तरीका बताऊँ:
👉ऊपर–नीचे–बीच–सिर”

  • ऊपर = वमन
  • नीचे = विरेचन
  • बीच (शरीर) = बस्ती
  • सिर = नस्य

यह line याद रखोगी तो पूरा topic दिमाग में set हो जाएगा 💯

📜 श्लोक (शिरोविरेचनोपग औषध):

वेल्लापामार्गव्योषदार्वीसुराला
बीजं शैरीषं बार्हतं शैग्रवं च।
सारो माधूकः सैन्धवं तार्थ्यशैलं
त्रुट्यौ पृथ्वीका शोधयन्त्युत्तमाङ्गम् ॥४॥


🔹 सरल अर्थ:

ये सभी औषधियाँ शिरोविरेचन (नस्य कर्म) में उपयोग होती हैं।
👉 इनका कार्य है उत्तमाङ्ग (सिर)जैसे नाक, मस्तिष्क, साइनस — की शुद्धि करना।


🔹 मुख्य औषधियाँ (list):

  • वेला
  • अपामार्ग
  • व्योष
  • दार्वी
  • सुराला
  • शिरीष बीज
  • बार्हत
  • शैग्रव
  • माधूक
  • सैन्धव
  • तार्थ्य शैल
  • त्रुटि
  • पृथ्वीका

🔹 याद करने का आसान trick:

👉वेल्ला–अपामार्ग–व्योष–दार्वी…”
(
पहली लाइन strong करो बाकी अपने आप flow में आएगा)

या super short:
👉वेल्ला अपामार्ग व्योष + शिरीष सैन्धव”


🔹 Exam point (must remember):

  • यह = शिरोविरेचनोपग औषध
  • उपयोग = नस्य (नाक से शुद्धि)
  • target = उत्तमाङ्ग (Head region)

🔥 5-second revision trick:

👉सिर = नस्य = शिरोविरेचन”

📜 श्लोक (वातघ्न औषध):

भद्रदारु नतं कुष्ठं दशमूलं बलाद्वयम्।
वायुं वीरतरादिश्च विदार्यादिश्च नाशयेत् ॥५॥


🔹 सरल अर्थ:

इस श्लोक में वे औषधियाँ बताई गई हैं जो वात दोष को नष्ट (शांत) करती हैं।
👉 यानी ये वातघ्न (Vata-pacifying) द्रव्य हैं।


🔹 मुख्य औषधियाँ:

  • भद्रदारु
  • नत (नागरमोथा)
  • कुष्ठ
  • दशमूल
  • बलाद्वय (बला + अतिबला)
  • वीरतरु
  • विदार्यादि

🔹 याद करने का आसान trick:

👉भद्रदारु–नत–कुष्ठ–दशमूल…”
(
पहली लाइन strong → बाकी flow में याद)

या ultra-short:
👉भद्रदारु + दशमूल + बला”


🔹 Exam point:

  • यह = वातघ्न औषध
  • काम = वात दोष को शांत करना

🔥 Quick concept link:

  • वात = दर्द, सूखापन, stiffness
    👉 ये औषधियाँ = स्नेह + बल देने वाली वात कम करती हैं

अगर तुम पूरे topic को revise कर रही हो, तो अभी तक:

  • वमन कफ
  • विरेचन पित्त
  • बस्ती वात
  • नस्य सिर
  • वातघ्न direct वात control

📜 श्लोक (पित्तघ्न औषध):

दूर्वाऽनन्ता निम्बवासाऽऽत्मगुप्ता
गुन्द्राऽभीरुः शीतपाकी प्रियङ्गुः।
न्यग्रोधादिः पद्मकादिः स्थिरे द्वे
पद्म वन्यं सारिवादिश्च पित्तम् ॥६॥


🔹 सरल अर्थ:

इस श्लोक में वे औषधियाँ बताई गई हैं जो पित्त दोष को शांत (cool down) करती हैं।
👉 यानी ये पित्तघ्न (Pitta-pacifying) द्रव्य हैं — ठंडी, शीतल प्रकृति वाली।


🔹 मुख्य औषधियाँ:

  • दूर्वा
  • अनन्ता
  • निम्ब (नीम)
  • वासा
  • आत्मगुप्ता
  • गुन्द्रा
  • अभीरु
  • शीतपाकी
  • प्रियंगु
  • न्यग्रोधादि
  • पद्मकादि
  • स्थिर द्वय
  • पद्म (कमल)
  • वन्य
  • सारिवादि

🔹 याद करने का आसान trick:

👉दूर्वा–अनन्ता–निम्ब–वासा…”
(
पहली लाइन पकड़ लो बाकी flow में याद)

या ultra-short:
👉दूर्वा निम्ब वासा + पद्म सारिवा”


🔹 Exam point:

  • यह = पित्तघ्न औषध
  • काम = पित्त को शांत करना (cooling effect)

🔥 Quick concept:

  • पित्त = गर्मी, जलन, acidity
    👉 ये औषधियाँ = शीतल (cooling) → पित्त कम

Final quick memory link:

  • वातघ्नभद्रदारु, दशमूल
  • पित्तघ्नदूर्वा, निम्ब, पद्म
    👉 (वात = dry, पित्त = heat → उसी हिसाब से drugs)

📜 श्लोक (कफघ्न औषध):

आरग्वधादिरर्कादिर्मुष्ककाद्योऽसनादिकः।
सुरसादिः समुस्तादिर्वत्सकादिर्बलासजित् ॥७॥


🔹 सरल अर्थ:

इस श्लोक में वे औषधियाँ बताई गई हैं जो कफ दोष को नष्ट (कम) करती हैं।
👉 यानी ये कफघ्न (Kapha-pacifying) द्रव्य हैं।


🔹 मुख्य औषधियाँ:

  • आरग्वधादि
  • अर्कादि
  • मुष्ककादि
  • असनादि
  • सुरसादि
  • समुस्तादि
  • वत्सकादि

👉 ये सभी समूह कफ को कम करने वाले हैं।


🔹 याद करने का आसान trick:

👉आरग्वध–अर्क–मुष्कक–असन…”
(
पहली लाइन strong → बाकी flow में याद)

या ultra-short:
👉आरग्वध + अर्क + सुरसा”


🔹 Exam point:

  • यह = कफघ्न औषध
  • काम = कफ दोष कम करना

🔥 Final SUPER QUICK REVISION (पूरे 7 श्लोक एक साथ):

👉 1. वमनकफ उल्टी
👉 2. विरेचनपित्त नीचे से
👉 3. निरूह बस्तीवात एनीमा
👉 4. नस्यसिर शुद्धि
👉 5. वातघ्नवात कम
👉 6. पित्तघ्नपित्त कम
👉 7. कफघ्नकफ कम


Golden memory trick:

👉ऊपर–नीचे–बीच–सिर + तीन दोष”

  • ऊपर = वमन
  • नीचे = विरेचन
  • बीच = बस्ती
  • सिर = नस्य
  • फिर = वात–पित्त–कफ

📜 श्लोक (जीवनीयगण):

जीवन्ती काकोल्यौ मेदे द्वे
मुद्गमाषपर्ण्यौ च।
ऋषभकजीवकमधुकं
चेति गणो जीवनीयाख्यः ॥८॥


🔹 सरल अर्थ:

इस श्लोक में वे औषधियाँ बताई गई हैं जो शरीर को जीवन, शक्ति और पोषण देती हैं।
👉 यानी ये जीवनीय (Restorative / nourishing) द्रव्य हैं।


🔹 मुख्य औषधियाँ:

  • जीवन्ती
  • काकोली
  • क्षीरकाकोली
  • मेदा
  • महामेदा
  • मुद्गपर्णी
  • माषपर्णी
  • ऋषभक
  • जीवक
  • मधुक

🔹 याद करने का आसान trick:

👉जीवन्ती–काकोली–मेदा…”
(
पहली लाइन पकड़ो बाकी flow में याद)

या ultra-short:
👉जीवन्ती + काकोली + मेदा + जीवक”


🔹 Exam point:

  • यह = जीवनीयगण
  • काम = शरीर को पोषण, शक्ति और आयु देना

🔥 Quick concept:

  • जहाँ कमज़ोरी, कमजोरी के बाद recovery, strength चाहिए
    👉 वहाँ जीवनीय औषधियाँ काम आती हैं

अब तक का FINAL FLOW (बहुत काम का):

  • 1–4 = शोधन (cleansing)
  • 5–7 = दोष शमन (वात-पित्त-कफ)
  • 8 = जीवन/पोषण (rejuvenation)

📜 श्लोक (विदार्यादिगण):

विदारिपञ्चाङ्गुलवृश्चिकाली
वृश्चीवदेवाह्वयशूर्पपर्ण्यः।
कण्डुकरी जीवनह्रस्वसंज्ञे
द्वे पञ्चके गोपसुता त्रिपादी ॥९॥


🔹 सरल अर्थ:

इस श्लोक में विदार्यादि गण की औषधियाँ बताई गई हैं।
👉 ये मुख्यतः बलवर्धक (strength-giving), पौष्टिक और वात-पित्त शमन करने वाली होती हैं।


🔹 मुख्य औषधियाँ:

  • विदारी
  • पञ्चाङ्गुल
  • वृश्चिकाली
  • वृश्चीव
  • देवाह्वय
  • शूर्पपर्णी
  • कण्डुकरी
  • जीवन (जीवन्ती)
  • ह्रस्व संज्ञक द्रव्य
  • गोपसुता
  • त्रिपादी

👉 (कुछ नाम समूह/प्रकार के रूप में भी लिए जाते हैं, इसलिए exact संख्या context पर depend करती है)


🔹 याद करने का आसान trick:

👉विदारी–पञ्चाङ्गुल–वृश्चिकाली…”
(
पहली लाइन strong → बाकी flow में याद)

या ultra-short:
👉विदारी + पञ्चाङ्गुल + शूर्पपर्णी”


🔹 Exam point:

  • यह = विदार्यादिगण
  • काम = बल, पोषण, शरीर को मजबूत करना

🔥 Quick concept link:

👉 अगर याद रखना हो:

  • जीवनीयगण → life + nourishment
  • विदार्यादिगण → strength + bulk (body building type)

📜 श्लोक (विदार्यादिगण के गुण):

विदार्यादिरयं हृद्यो बृंहणो वातपित्तहा।
शोषगुल्माङ्गमर्दोर्ध्वश्वासकासरहरो गणः ॥१०॥


🔹 सरल अर्थ:

यह विदार्यादिगण

  • हृद्यहृदय के लिए अच्छा
  • बृंहणशरीर को पोषण व बल देने वाला
  • वात-पित्त हरवात और पित्त को शांत करता है

और यह निम्न रोगों को दूर करता है:

  • शोष (दुर्बलता/क्षय)
  • गुल्म (गांठ/अर्बुद जैसे विकार)
  • अंगमर्द (body pain)
  • ऊर्ध्वश्वास (सांस की समस्या)
  • कास (खांसी)
  • ज्वर (बुखार)

🔹 Exam keywords (must remember):

👉 हृद्य + बृंहण + वातपित्तहर


🔹 याद करने का easy trick:

👉हृद्य–बृंहण–वातपित्तहर”
(3
शब्द पकड़ लो पूरा answer बन जाएगा)

या थोड़ा fun trick:
👉 “Heart + Health + Strength = Vidारी”


🔥 Quick concept:

  • विदार्यादिगण = strength + nourishment + healing
    👉 इसलिए ये कमज़ोरी, दर्द, सांस और खांसी में useful है

Ultra-short revision line:

👉विदारी = बृंहण + वातपित्तहर + शोष-कास-श्वास नाशक”

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