“स्यतासी लृलुटोः,सार्वधातुक,आर्धधातुकं शेषः”

“स्यतासी लृलुटोः” पाणिनीय अष्टाध्यायी के तीसरे अध्याय के प्रथम पाद का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विधि सूत्र (Operational Rule) है (अष्टाध्यायी ३.१.३३)। यह सूत्र संस्कृत व्याकरण की तिङन्त प्रक्रिया (धातु रूप / Verb Forms) के अंतर्गत भविष्यत् काल (Future Tense) और अनद्यतन भविष्यत् काल के रूपों को सिद्ध करने के लिए प्रत्ययों (विकरण) का विधान करता … Continue reading “स्यतासी लृलुटोः,सार्वधातुक,आर्धधातुकं शेषः”