uttarramcharitam dwitiya ank 20-30(उत्तररामचरितम् द्वितीय अंक)
श्लोक (21): दधति कुहरभाजामत्र भल्लूकयूना-मनुरसितगुरूणि स्त्यानमम्बूकृतानि ।शिशिरकटुकषायः स्त्यायते शल्लकीनाम्इभदलितविकीर्णग्रन्थिनिष्यन्दगन्धः ॥ २१ ॥ शब्दार्थ (Word Meaning): हिन्दी अर्थ (Hindi Arth): यहाँ गुफाओं में रहने वाले युवा भालू पेड़ों से निकले हुए रस (गोंद) को चाटकर उसे और अधिक गाढ़ा बना देते हैं। शीत ऋतु के कारण शल्लकी वृक्षों का रस कड़वा और कसैला होकर जम जाता … Continue reading uttarramcharitam dwitiya ank 20-30(उत्तररामचरितम् द्वितीय अंक)
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