महाकवि कालिदास द्वारा विरचित ‘मेघदूतम्’ (पूर्वमेघ)31-40
श्लोक: दीर्घीकुर्वन् पटु मदकलं कूजितं सारसानां, प्रत्युषेषु स्फुटितकमलामोधमैत्रीकषायः। यत्र स्त्रीणां हरति सुरतग्लानिमनुकूलः, शिप्रावातः प्रियतम इव प्रार्थनाचाटुकारः॥ 31वाँ श्लोक शब्दार्थ एवं अन्वय (भावार्थ हेतु): सरल हिंदी व्याख्या: कालिदास कहते हैं कि उज्जयिनी नगरी में भोर के समय शिप्रा नदी की हवा बड़ी ही सुखद होकर बहती है। श्लोक: हारांस्तारांस्तरलगुटिकान् कोटिशः शङ्खशुक्तीः शस्पश्यामान् मरकत-मणीनुन्मयूपखप्ररोहान्। दृष्ट्वा यस्यां विपणिरचितान् … Continue reading महाकवि कालिदास द्वारा विरचित ‘मेघदूतम्’ (पूर्वमेघ)31-40
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