संज्ञाप्रकरणम् – लोप और प्रत्याहार निर्माण -अदर्शनं लोपः (१।१।६०),तस्य लोपः (१।१।९),आदिरन्त्येन सहेता (१।१।७१) – प्रत्याहार सूत्र

विषय: संज्ञाप्रकरणम् – लोप और प्रत्याहार निर्माण लघुसिद्धान्तकौमुदी के इस भाग में हम यह समझेंगे कि ‘इत्’ संज्ञा होने के बाद उन वर्णों का क्या होता है और ‘प्रत्याहार’ कैसे बनते हैं। १. अदर्शनं लोपः (१।१।६०) २. तस्य लोपः (१।१।९) ३. आदिरन्त्येन सहेता (१।१।७१) – प्रत्याहार सूत्र यह व्याकरण का सबसे महत्वपूर्ण सूत्र है जो … Continue reading संज्ञाप्रकरणम् – लोप और प्रत्याहार निर्माण -अदर्शनं लोपः (१।१।६०),तस्य लोपः (१।१।९),आदिरन्त्येन सहेता (१।१।७१) – प्रत्याहार सूत्र