त्रिदोष सिद्धान्त (अष्टाङ्गहृदय के अनुसार)

त्रिदोष सिद्धान्त (अष्टाङ्गहृदय के अनुसार) आयुर्वेद का सबसे प्रसिद्ध और मूलभूत सिद्धान्त त्रिदोष सिद्धान्त है। सम्पूर्ण शरीर की क्रियाएँ तीन दोषों—वात, पित्त और कफ—पर आधारित मानी गई हैं। श्लोक वातपित्तकफाः दोषाः समासतः।विकृता अविकृता देहं घ्नन्ति ते वर्तयन्ति च॥ अर्थ वात, पित्त और कफ ये तीन दोष हैं। ये जब संतुलित (सम) रहते हैं तो शरीर … Continue reading त्रिदोष सिद्धान्त (अष्टाङ्गहृदय के अनुसार)