अष्टाङ्गहृदयम् (Ashtanga Hridaya) आयुष्कामणीय अध्याय

आयुष्कामनीय अध्याय (अष्टाङ्गहृदय सूत्रस्थान प्रथम अध्याय) – संक्षिप्त सार “आयुष्कामनीय” अष्टाङ्गहृदय का प्रथम अध्याय है। “आयुष्कामनीय” का अर्थ है—जो व्यक्ति दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की इच्छा रखता है, उसके लिए उपदेश। इस अध्याय में वाग्भटाचार्य ने आयुर्वेद के मूल सिद्धान्तों का संक्षिप्त परिचय दिया है। 1. आयुर्वेद का उद्देश्य आयुर्वेद के दो मुख्य उद्देश्य बताए … Continue reading अष्टाङ्गहृदयम् (Ashtanga Hridaya) आयुष्कामणीय अध्याय