वेदान्तसार by सदानन्द योगी (vedantasara of sadananda) अनुबन्ध चतुष्टय

1. वेदान्त की परिभाषा (Definition of Vedanta) “वेदान्तो नामोपनिषत्प्रमाणं तदुपकारीणि शारीरकसूत्रादीनि च।” 2. अनुबन्धों की आवश्यकता (Need for Anubandhas) “अस्य वेदान्तप्रकरणत्वात्तदीयैरेवानुबन्धैस्तद्वत्तासिद्धेर्न ते पृथगालोचनीयाः।” 3. अनुबन्ध चतुष्टय (The Four Preliminary Elements) “तत्रानुबन्धो नामाधिकारिविषयसम्बन्धप्रयोजनानि॥ ३ ॥” किसी भी दार्शनिक ग्रंथ को पढ़ने से पहले चार प्रश्नों का उत्तर होना आवश्यक है, जिसे ‘अनुबन्ध चतुष्टय‘ कहते हैं: 1. … Continue reading वेदान्तसार by सदानन्द योगी (vedantasara of sadananda) अनुबन्ध चतुष्टय