uttarramcharitam dwitiya ank 11-20 (उत्तररामचरितम् द्वितीय अंक)

🔹 श्लोक दत्ताभये त्वयि यमादपि दण्डधारेसंजीवितः शिशुरसौ मम चेयमृद्धिः ।शम्बूक एष शिरसा चरणौ नतस्तेसत्सङ्गजानि निधनान्यपि तारयन्ति ॥ ११ ॥ 🔹 शब्दार्थ 🔹 भावार्थ (Simple Meaning) हे राम! आपने जब इस बालक को अभय दिया, तो वह यमराज के दण्ड से भी बचकर पुनः जीवित हो गया। यह मेरे लिए बहुत बड़ा सौभाग्य है। यह शम्बूक … Continue reading uttarramcharitam dwitiya ank 11-20 (उत्तररामचरितम् द्वितीय अंक)