Kālidāsa’s Meghadūtam (Purvamegha)पूर्वमेघ 1-10,महाकवि कालिदास द्वारा रचित ‘मेघदूतम्
Kālidāsa’s Meghadūtam (Purvamegha) श्लोक (Original Text) 1-कश्चित् कान्ताविरहगुरुणा स्वाधिकारात् प्रमत्तः शापेनास्तङ्गमतिमहिमा वर्षभोग्येण भर्तुः। यक्षश्चक्रे जनकतनयास्नानपुण्योदकेषु स्निग्धच्छायातरुषु वसतिं रामगिर्याश्रमेषु॥ १॥ श्लोक का हिंदी अर्थ अपने कर्तव्य के प्रति असावधान (प्रमत्तः) रहने वाले किसी यक्ष को उसके स्वामी (कुबेर) ने शाप दिया। वह शाप एक वर्ष तक भोगा जाने वाला था और उसके प्रभाव से यक्ष की … Continue reading Kālidāsa’s Meghadūtam (Purvamegha)पूर्वमेघ 1-10,महाकवि कालिदास द्वारा रचित ‘मेघदूतम्
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